Wednesday, May 13, 2026

शेखीखोर शेखचिल्ली


एक बार शेखचिल्ली अपनी ससुराल गए। ससुराल में उनकी बड़ी ख़ातिरदारी हुई। मजेदार पकवान खिलाए गए, सोने जाएं तो साले पैर दबाएं, नहाने जाएं तो साले नल चलाएं, खाना खाएं तो सासू मां पंखा झलें। ओहो कहना ही क्या? बस मजा ही मजा।

तीन-चार दिन की मेहमान नवाज़ी के बाद जब शेखचिल्ली अपनी बीवी को लेकर विदा होने लगे तो ससुराल वालों ने उनको एक सोने की अंगूठी दी और उनकी पत्नी को सुंदर सी भारी पायलें। अब तो शेखचिल्ली फूले न समाएं। ससुराल हो तो ऐसी।

खुशी-खुशी शेखचिल्ली अपनी मेहरारू को लेकर वापस अपने गांव आ गए। ससुराल में हुई खातिरदारी अभी तक दिमाग से उतर नहीं रही थी। रह-रह कर अपनी सोने की अंगूठी को निहारें। 

पर पता नहीं क्यों शेखचिल्ली को एक मलाल होने लगा कि यार इतनी बढ़िया अंगूठी और पायलें ससुराल से मिलीं, लेकिन गांव वालों ने तो देखी ही नहीं। गांव वालों को ये तोहफे कैसे दिखाए जाएं? खुद सबके घर जा-जाकर बताएं तो अच्छा नहीं लगेगा। सो, उन्होंने एक तरकीब सोची कि पूरे गांव वालों को दावत दी जाए। दावत के बहाने आएंगे तो अपने आप अंगूठी और पायल दिख जाएंगी।

तो भैया पूरे गांव में बुलऊवा लगवा दिया गया। शेखचिल्ली ने खाने का बढ़िया इंतजाम करवाया। शेखचिल्ली ने अपनी चमकती सोने की अंगूठी पहन ली और बीवी ने अपनी पायलें। तय हुए दिन पूरा गांव दावत छकने आ गया। लोग तो सब इकट्ठे हो गये, लेकिन शेखचिल्ली के मन में बार-बार हलचल हो रही कि गांव वाले उनकी अंगूठी और पायलों की ओर क्यों नहीं देख रहे।

लोगों की पंगत बैठाने के लिए पट्टियां बिछा दी गईं। लेकिन लोगों ने अभी तक अंगूठी की ओर नहीं देखा। तभी शेखचिल्ली को फिर एक तरकीब सूझी और उन्होंने अपनी अंगूठी वाली उंगली से इशारा करते हुए सबसे कहा- भैया इधर कतार में बैठो, भैया उधर कतार में बैठो। तभी सब लोगों की नज़र चमकती अंगूठी पर पड़ी और सब लोग पूछ बैठे- अरे भई शेखचिल्ली अंगूठी तो बड़ी जबरदस्त है कब बनवाई। तब जाकर शेखचिल्ली की जान में जान आई और बोले- बनवाई नहीं भैया, ससुराल से मिली है, खालिस सोने की है, 5 तोला। लोगों ने कहा वाह शेखचिल्ली खूब ससुराल पाई, जो इतनी भारी सोने की अंगूठन बनवाई।

लेकिन बात अभी तक अधूरी ही थी, शेखचिल्ली की बीवी की पायलों को लोग अभी तक नहीं देख पाए थे। तभी शेखचिल्ली की बीवी को भी एक तरकीब सूझी। कतार में बैठे लोगों के सामने जब पत्तल रखने की बारी आई, तो शेखचिल्ली की बीवी ने अपना पांव पटक-पटक कर पत्तल वालों से कहा- यहां रख पातर, यहां रख पातर। ऐसा करते ही पायलों की झुनझुन सबको पड़ी सुनाई और चमकदार चांदी सबको पड़ी दिखाई। गांव की औरतें बोलीं- का दुल्हिन पायलें कब बनवाईं। बीवी बोली- बनवाई नहीं मयके से आईं, पूरे 20 तोले। गांव की औरतों ने पायलों की खूब तारीफ सुनाई और खा पीकर सबने ली विदाई।

शाम को शेखचिल्ली का मलाल थोड़ा कम हुआ और अपनी बीवी से बोले, अगर ये गांव वाले पहले ही हमारी अंगूठी और पायलें देख लेते तो क्यों बेकार में इतनी बड़ी दावत देनी पड़ती।


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